अपडेट EVM से होगा विधानसभा चुनाव, बैटरी लो हुई तो मशीन बदलने की जरूरत नहीं

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव इस बार अपडेट ईवीएम से होंगे। अपडेट वर्जन सभी जिलों में भेज दिया गया है। यहां 2018 के विधानसभा चुनाव में ईवीएम के एम-3 वर्जन लांच किया गया था। तब भी छत्तीसगढ़ और उसके साथ कुछ अन्य राज्यों में सबसे पहले उस वर्जन का इस्तेमाल हुआ था। इस बार अपडेट वर्जन में कुछ अहम बदलाव हैं। पहले जिस सेक्शन में कैंडिडेट्स के नाम होते थे, उसी सेक्शन में बैटरी होती थी। चुनाव के दौरान अगर बैटरी खत्म हो जाए, तो मशीन बदलनी पड़ जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बैटरी के सैक्शन को कैंडिडेट सेक्शन से अलग कर दिया गया है। वीवीपैट को भी अपडेट किया गया है।

छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम के चुनाव में 2018 में ईवीएम एम-3 का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन इस बार अपडेट वर्जन का ही उपयोग होगा। भारत निर्वाचन आयोग के मापदंडों के मुताबिक निर्वाचन के लिए जितने मतदान केंद्र होते हैं, उसका 125 प्रतिशत बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट होना चाहिए। इसी तरह 135 प्रतिशत वीवीपैट की जरूरत होती है। छत्तीसगढ़ में तकरीबन 24000 मतदान केंद्र हैं। इसके मुताबिक करीब 30000 से ज्यादा ईवीएम विभिन्न जिलों में भेज दिए गए हैं। अपडेट ईवीएम को इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद से मंगवाया गया है।

वीवीपैट में भी ट्रांसपेरेंसी

इसमें वीवीपैट को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया है। पहले मशीन की कमिशनिंग के दौरान राजनीतिक दलों के पर्यवेक्षकों के सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर वीवीपैट की डिटेल्स डाली जाती थी। कंप्यूटर स्क्रीन छोटा होने पर दूर बैठे राजनीतिक दलों के पर्यवेक्षकों को यह दिखता नहीं था। अब यह बड़ी स्क्रीन पर डिस्प्ले होगा। जिससे बाद में होने वाले विवाद नहीं होंगे। ट्रांसपरेंसी बढ़ेगी।

बैटरी के कारण बदलती थी वोटिंग मशीन

ईवीएम में कैंडिडेट्स के नाम जहां अपलोड होते थे, वहीं बैटरी होती थी। आसान भाषा में समझें तो एक बार ईवीएम लाॅक होने के बाद उसे कोई भी खोल नहीं सकता। उसे सील कर दिया जाता था। बैटरी का सेक्शन वहीं होने के कारण मशीन ही बदलनी पड़ती थी। यह समस्या अब दूर कर ली गई है।

ऐसे होता है अपडेशनजब भी चुनाव होते हैं तो जहां-जहां मशीनें लगी होती हैं, वहां कंपनियों के इंजीनियर्स भी फीडबैक के लिए पहुंचते हैं। वे वहां आने वाली दिक्कतों को समझते हैं। इसके अलावा आयोग के अफसर भी फीडबैक के आधार पर सुझाव देते हैं। दोनों के सुझाव और फीडबैक के आधार पर मोडिफिकेशन का काम होता है।

384 प्रत्याशी होने पर भी मतदान संभव

  • एम-3 अपडेट वर्जन में 384 उम्मीदवार होने पर भी 24 बैलेट यूनिट से मतदान हो सकेगा।
  • ईवीएम एम-2 में स्लाइडर स्विच होता था, जबकि एम-3 में थंब व्हील स्विच है।
  • पिंक पेपर की डिजाइन बदली है। यही नहीं, ईवीएम सील करने की प्रक्रिया एक बार ही होगी।

बूथ पर वोटिंग रुकने से होती है बड़ी परेशानी

जब वोटिंग होती है, तो राजनीतिक दलों के पर्यवेक्षक बूथ में मौजूद होते हैं। लो बैटरी की वजह से जब मशीन बदली जाती थी, तो कई जगह समय लगता था। इसे लेकर विवाद की स्थिति की आशंका रहती थी। सवाल उठते थे कि मशीन क्यों बदली जा रही है। अब ऐसी स्थिति ही नहीं आएगी। अब मतदान बाधित नहीं होगा। जब बैटरी लो होगी, उस दौरान सिर्फ बैटरी के सेक्शन को चेंज किया जा सकेगा।

 

 

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